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एक गजल - जिंदगी फूल भी कांटे भी

                
                                                         
                            एक गजल: जिंदगी फूल भी कांटे भी
                                                                 
                            
देखा है जिंदगी को मुश्किलों में रोते हुए,
जैसे देखा है फूलों को कांटों पर सोते हुए,

दो चार दिन की हस्ती है न कर गुमान बंदे
हमने देखा है सूरमाओं को रास्ते में रोते हुए,

गम न कर ये दौर भी तो यूं ही गुजर जाएगा,
ज्यों हर बशर की रात कट जाती है सोते हुए

हर महफिल में दो चार दीवाने नजर आते हैं
देखा है शमा पर परवानों की तरह फ़ना होते हुए,

कल जिन्हें देखा था अर्श पर बैठे हुए भूषण
बहुतों को देखा है महल का मलवा ढोते हुए.....
 
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एक वर्ष पहले

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