क्या बताऊं दोस्त आज रात क्या करिश्मा हुआ,
शब-ए-वस्ल में लगा सारा आसमान रौशन
हुआ,
उस का साथ था तो सारी कायनात अपनी थी,
क्या बताऊं तुझ बिन इस दिल ए नादान का क्या हश्र हुआ,
वस्ल की निशानियों से पूरा बदन रोमांचित है
क्या कहूं निशान ए हिज़्र से दिल कहां कहां जख्मी हुआ,
मेरी हर सांस तेरी मुहब्बत की खुशबू से सराबोर थी,
शब ए हिज़्र के बाद मुझे अपनी जिंदगी पर
यकीं न हुआ,
भर गया है दिल इस दुनिया से हे मेरे परवरदिगार,
अब जीना किसके लिए भूषण जिसे चाहा वो भी अपना न हुआ....
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