चांद की सैर
आओ चलें सजना बादलों के पार,
जहां रहता है चांद सितारों के साथ,
एक दूसरे का पकड़ के हाथ,
मन ही मन भर कर उड़ान
आओ चलें मितवा बादलों के पार,
चांद वाली बुढ़िया ने भेजी हैं सीढ़ियां,
चौदहवीं का चांद है ख्वाब सजाने
आओ चलें सजना चांद के पास,
बुढ़िया के संग जा के मौज मनाएंगे,
तन्हा है चांद उसका दिल बहलाएंगे
आओ चलें मितवा बुढ़िया के पास,
अकेली है वो या कोई है उसके पास,
काली काली रेशमी घटाओं के पार,
जहां बरसता है प्यारी घटाओं का प्यार,
चरखे वाली बुढ़िया से मिल कर आयेंगे,
उसका संदेश हम धरती पर ले आएंगे,
दो चार दिन रहकर मौज मनाएंगे,
बचपन वाले मामा से भी मिल कर आयेंगे,
आते समय कुछ तारे लेकर भी आएंगे,
धरती पे आके उन्हे खेतों में उगाएंगे,
हम भी खेतों को चांद तारों से सजाएंगे,
बदरंग हो गई धरती को रंगीन बनायेगे,
प्यार वाले पौधे हम भरपूर उगाएंगे,
फैली है कटुता न रहा आपसी प्यार,
द्वार द्वार बांटेगे ये प्यार वाले पौधे,
फैलाएंगे लोगों में भाई चारे वाला प्यार,
चांद वाली बुढ़िया का देकर संदेश ,
प्यार मोहब्बत का अलख जगाएंगे,
कहीं देर न हो जाए तुम हो जाओ तैयार,
आओ चलें मितवा उन बादलों के पार,
ẞhushan
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