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बिना स्पर्श प्रेम

                
                                                         
                            बिना स्पर्श प्रेम
                                                                 
                            
हाँ मुझे उससे प्रेम है,
छुआ नहीं, देखा नहीं,
पर वो हरदम लिपटा रहता है,
मेरी आत्मा से,

न उसे न ही मुझे उसके जिस्म से,
न मन से कोई आकर्षण है,
बस रूह से रूह का समर्पण है,

जिस्मानी प्रेम तो है मात्र वासना,
जो कहलाता है जिस्मानी प्रेम,
प्रेम शब्द बदनाम हो गया,
जब से मिलाया इसे जिस्म के साथ,

मुझे घिन है ऐसे लोगों से,
जिन्होंने प्रेम मुहब्बत को जिस्म से जोड़ दिया,
क्या प्रेम केवल जिस्मानी है, रूहानी नहीं,

क्या लैला मजनूँ, शीरी फरहाद, हीर रांझा या सोहनी महिवाल का इश्क जिस्मानी था
गर जिस्मानी होता तो ऐतिहासिक होता?

असली प्रेम था राधा और कृष्ण का,
मीरा और कृष्ण का,
जिसे कहते हैं रूहानी प्रेम,
जिस्म से जोड़ कर
लोगों ने नाम दे दिया जिस्मानी प्रेम.
-कुल भूषण 
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3 वर्ष पहले

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