ज़िंदगी में रहना ज़रूरी है,
ज़िंदगी को जीना भी ज़रूरी है।
इस भीड़ में कहीं खो न जाना,
अपने आप से मिलना ज़रूरी है।
दुनिया की आवाज़ों में
अपनी आवाज़ दबने मत देना,
किसी और के होने से पहले
ख़ुद का होना ज़रूरी है।
रिश्ते निभाना ज़रूरी है,
मगर ख़ुद को बचाना भी ज़रूरी है।
कितने ही चेहरे मिलेंगे राहों में,
मगर आईने में जो चेहरा है—
उससे पहचान बनाए रखना ज़रूरी है।
क्योंकि ज़िंदगी सिर्फ़ साँसों का नाम नहीं,
इस दुनिया में अपनी एक जगह,
अपनी एक पहचान,
और अपने होने का एहसास ज़रूरी है।
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