आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अपने आप से मिलना ज़रूरी है।

                
                                                         
                            ज़िंदगी में रहना ज़रूरी है,
                                                                 
                            
ज़िंदगी को जीना भी ज़रूरी है।

इस भीड़ में कहीं खो न जाना,
अपने आप से मिलना ज़रूरी है।

दुनिया की आवाज़ों में
अपनी आवाज़ दबने मत देना,
किसी और के होने से पहले
ख़ुद का होना ज़रूरी है।

रिश्ते निभाना ज़रूरी है,
मगर ख़ुद को बचाना भी ज़रूरी है।

कितने ही चेहरे मिलेंगे राहों में,
मगर आईने में जो चेहरा है—
उससे पहचान बनाए रखना ज़रूरी है।

क्योंकि ज़िंदगी सिर्फ़ साँसों का नाम नहीं,
इस दुनिया में अपनी एक जगह,
अपनी एक पहचान,
और अपने होने का एहसास ज़रूरी है।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर