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नज़्म :घर बोलता है

                
                                                         
                            सुना है आपने कभी घर बोलता है
                                                                 
                            
हां ये सच है, घर भी बोलता है
दीवारें रोती हैं, फर्श जलता है
खिड़कियां बिलखती हैं
छत और दरवाजा खामोश रहे
पर उनका भी दर्द बोलता है
ईंटें और पत्थरों पर किसकी नज़र
जाए, उनका भी दम घुटता है
घर बोलता है, चलने फिरने की
बच्चों और बड़ों की चहल कदमी
सुनने को तरसता है, घर बोलता है
इसे भी साथ चाहिए अपनों का
घर में लोग हों तो घर "घर बनता है"

- किशन खराड़ी
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9 घंटे पहले

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