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गरीब का अमीर सपना

                
                                                         
                            क्या किसी गरीब को अमीर सपना देखने का हक नहीं
                                                                 
                            
क्या अमीरी केवल अमीरों की जागीर है
गरीबों का हक नहीं
अमीर आदमी अदब से बात करे तो "साहब"
और गरीब आदमी अदब से बात करे तो
षाणा बन रहा है
गांव हो शहर हो गरीब हर जगह गाली खाता है
क्या गरीब को सम्मान पाने का हक नहीं
कोई मां के पेट से अमीर पैदा नहीं होता
"क्यों नहीं होता" होता है
अमीर के घर जन्मा तो अमीर ही होगा
गरीब के घर जन्मा तो गरीब ही होगा
हां यह बात और है कि
अपनी मेहनत से कोई गरीब अपनी गरीबी
मिटा सकता है
हां मानते हैं कि अमीरों के दुख भी अमीर होते हैं बड़े होते हैं
गरीबों के भी अपने दुख होते हैं
पैसे कम और अरमान बड़े होते हैं
अमीर सोचता है कि मेरे बाद मेरी दौलत का क्या होगा
गरीब सोचता है कि आज मेरे पास पैसा नहीं
कल मेरे बच्चों का भविष्य क्या होगा
अजीब कशमकश है अमीर भी और गरीब भी
फिर भी ये बात तो सच है कि अमीर होना वरदान है
और गरीब होना अभिशाप है
अमीरी और गरीबी में यही भिन्नता है
हर गरीब देखता है अमीर होने का सपना
यही तो है एक गरीब का अमीर सपना

-किशन खराड़ी 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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