सुख में कहीं न कहीं दुख है
दुख में भी कहीं न कहीं सुख है
दुख बिन सुख सुख बिन दुख नहीं
चाहिए ऐसी कोई झंझट नहीं
फिर भी बिन बुलाए मेहमान
घुसे चले आते हैं जिंदगी में
शांति और सुकून कभी मिलता ही नहीं
ये पल कभी ठहरता ही नहीं
दोनों मेहमान दौड़ लगा रहे
न जाने कब से
मगर कभी कोई जीतता ही नहीं
शांति और सुकून कभी मिलता ही नहीं
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