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बेवजह की मोहब्बत

                
                                                         
                            ठीक है उसे मोहब्बत नहीं
                                                                 
                            
पर वो मुझे देखता तक नहीं
कोई दोस्त थी उसे याद तक नहीं
अनदेखा ऐसे करता जैसे कोई है ही नहीं
हे मेरे प्रभु ये मेरे किस जुर्म की सजा है
कि उससे मोहब्बत की कोई वजह नहीं
उसे ज़हन से निकालूं तो निकालूं कैसे
मुझे है मोहब्बत ये बताऊं तो बताऊं कैसे
क्या ऐसी कश्मकश का कोई हल नहीं
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11 महीने पहले

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