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                            कोई शिक्षण
                                                                 
                            
या शोध संस्थान
होता है
एक खेत
जिसमें बोता है बीज
एक समर्पित वैज्ञानिक
एक समर्पित शिक्षक
जिसे बाध्य कर देती है
तुम्हारी कुव्यवस्था
तुम्हारी कुराजकता
पलायन के लिए
कहीं दूर।

दादी ने बताया था
राजहठ से
रूठ जाया करती है
खेत की मिट्टी
बीज
और मेघ भी।
ग्रहण लग जाता है
खेत की उर्वरता को
फिर कोई बीज
नहीं उगता वहाँ
पहले की तरह,
जानकर भी यह सब
तुम नहीं चाहते
छोड़ना अपना हठ
और खींचकर सारा सत्व
हर बायोलाॅजिकल से
शनैः शनैः बनाते जा रहे हो तुम
सब कुछ
नानबायोलाॅजिकल।

क्या करोगे
इतने बंजर खेतों का!
अचंभित है विश्व
इतनी निर्लज्जता ओढ़कर
कैसे जी लेते हो तुम!
सूर्य को ओढ़ाकर
बादलों के लबादे
कब तक बंदी रखोगे तुम!
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2 घंटे पहले

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