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यूँ ही मुलाक़ात हो गई 

                
                                                         
                            न सुबह हुई, न शाम हुई,
                                                                 
                            
बस रात की बात हो गई।
न बादल थे, न घटा छाई,
बस यूँ ही बरसात हो गई।

कुछ पल थे, कुछ बातें थीं,
कुछ ख़ामोशियाँ साथ थीं,
पता ही नहीं चला कैसे,
दो दिलों में बात हो गई।

न कोई वादा, न कोई ख़्वाब,
न मिलने की कोई बात थी,
यूँ ही एक दिन अचानक,
उनसे मुलाक़ात हो गई।

उनकी आँखों में जो देखा,
वो मेरी कायनात हो गई।
यूँ ही उनसे एक दिन मिलकर,
ज़िंदगी थोड़ी ख़ास हो गई।
—कमल किशोर झा 
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59 मिनट पहले

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