दिखती रही वो आरजू ,छुपती रही वो कहानियां
कहते रहे लफ्ज ,सुनती रही वो खामियां
होती रही दूरियां ,सहमे रहे वो अदाकारिया
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X