कब तक देश की बेटी को यूं नोच दरिन्दे खाएंगे,
आखिर कब तक बने नपुंसक हम यूं मोम जलाएंगे,
पूछ रही हैं सभी बेटियां देश के ठेकेदारों से,
बेटियां नोची जायेंगी कब तक वहशी हत्यारो से,
पढे बेटियां,बढे बेटियां इससे अधिक जरूरी है कि
हैवानों को फाँसी दो हमें मुक्त करो चीत्कारो से,
यूं तो भीड़ की दी मौत के पक्ष मे मैं ना रहती हूँ पर
बलात्कारी को लटका दो चौराहे पर अब कहती हूँ,
जल्लादों को भारत मे जीने का तुम अधिकार न दो
जिन्दा इन्हें जला डालो कोई कानूनी हथियार न दो,
लज्जा लूटने वालों को कुछ नाबालिग बतलाते हैं,
फिर हत्यारे होकर भी साले सजा नहीं वह पाते हैं,
कहाँ गये वो ज्ञानी जो हम सब को पाठ पढ़ाते हैं
कपड़ों मे ही दोष था हर घटना पर जो समझाते हैं,
नारी का जो मान न रखे पैदा होते मर जाए
माँ बाँझ ही रहे उम्र भर पर कपूत ना घर आए,
कहते हैं स्वर्ग की सीढ़ी है बेटा जन माँ तर जाती है,
पर पूत कपूत सा हो तो माएं जिन्दा ही मर जाती है….
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