कुछ नाम वक़्त नहीं लिखता,
कुछ रिश्ते उम्र नहीं चुनती,
वे जन्मों की देहरी लाँघकर,
रूहों में अपनी जगह बुनती।
न जाने किस घड़ी, किस पहर,
सितारों ने कोई कथा रची,
दो अनजान राहों के बीच,
एक अदृश्य-सी डोर बँधी।
फिर एक दिन वही अनदेखा रिश्ता,
जीवन की चौखट पर उतर आया,
जो कभी दुआ था ख़ामोशियों में,
उसने हक़ीक़त का रूप पाया।
अब हाथों की इन रेखाओं में,
बस एक नाम सँवरता रहे,
समय भले ही करवट बदले,
यह अनुराग अमर ठहरता रहे।
क्योंकि प्रेम केवल मिलना नहीं,
एक-दूजे में स्वयं को पाना है,
कुछ रिश्तों का कोई अंत नहीं होता,
उन्हें बस हर जन्म निभाना है।
- ज्योति अग्निहोत्री ‘नित्या’
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