ये आशा की किरणें हैं
ना लौ ये दीपक की,
मिलेंगी गले सबसेऔर
दूर तक जायेंगी ।
कुछ बाँटेंगी गम अपने
कुछ खुशियां ये लायेंगी,
खेलेंगी अंधेरों में
उजालों में नहायेंगी ।
ये आशा की किरणें हैं
ना लौ ये दीपक की,
मिलेंगी गले सबसे और
दूर तक जायेंगी।
किस्से ये सूरज के
सबको सुनायेंगी,
चाँद को अपना ये
पडौसी बतायेंगी।
चीर के बादल ये
धरा में समायेंगी,
कहानी अपनी ये
यूँ ही सुनायेंगी।
ये आशा की किरणें हैं
ना लौ ये दीपक की,
मिलेंगी गले सबसे और
दूर तक जायेंगी ।
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