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मोहि रंग कोई भी दे दे कृष्णा

                
                                                         
                            तू ईष्टदेव है देव है मेरे मन का
                                                                 
                            
तू रखवाला इस माटी तन का,
भक्ति भाव में तेरे में
जन्मों जन्म समा जाऊँ ।
रहकर तेरे चरणों में
बस भक्ति में तेरी रह जाऊँ,
मोह का दल दल तरके
रहे नहीं दिल में कोई तृष्णा;
मोहि रंग कोई भी दे दे कृष्णा
मोहि ढंग कोई भी दे दे कृष्णा ।
रहकर तेरे चरणों में
बस भक्ति में तेरी रह जाऊँ,
मोह का दल दल तरके
रहे नहीं दिल में कोई तृष्णा;
मोहि रंग कोई भी दे दे कृष्णा
मोहि ढंग कोई भी दे दे कृष्णा ।
मैं धन दौलत से बंधा हुआ था
काम मोह में रजा हुआ था,
कोई त्याग नहीं था मेरे अन्दर
बनने चला था मोह समंदर ।
अब प्यास रही ना भूख रही
जो भक्ति भाव की बात रही,
मन ऐसा है मेरा अब
कृष्ण देव पे वार दूँ सब
और जीवन मुक्त में हो जाऊँ ।
रहकर तेरे चरणों में
बस भक्ति में तेरी रह जाऊँ,
मोह का दल दल तरके
रहे नहीं दिल में कोई तृष्णा;
मोहि रंग कोई भी दे दे कृष्णा ।
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2 घंटे पहले

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