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देव समय के ओ मेरे

                
                                                         
                            देव समय के ओ मेरे
                                                                 
                            
जरा चाँद सूर्य को ये कह दो,
कभी आ जायें बेवक्त ये मिलने
ये मेहमान धरा के हैं कह दो ।
वर्षों से है बारिश रूठी
दी उसने है आशा झूठी,
फिर इतराते ये बादल क्यूँ हैं
इनसे जाकर तुम ये कह दो ।
कभी आ जायें बेवक्त ये मिलने
ये मेहमान धरा के हैं कह दो
देव समय के ओ मेरे
जरा चाँद सूर्य को ये कह दो ।
हवा ठहकती है खुद में
क्यूँ गरम हो रही मैं दिन हर दिन,
हवा महकती है ऋतु में
जब फूल पौधों पे आ जायें ।
हवा को थमने को कह दो
जब बादल नीर संग आ जायें,
हवा ठहरने को कह दो
जब सब खुश्बू उसमें घुल जायें।
देव समय के ओ मेरे
जरा चाँद सूर्य को ये कह दो,
कभी आ जायें बेवक्त ये मिलने
ये मेहमान धरा के हैं कह दो ।
देव समय के ओ मेरे
जरा चाँद सूर्य को ये कह दो ।
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4 घंटे पहले

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