आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एक बूढ़ा कवि

                
                                                         
                            सुनसान जगह पर
                                                                 
                            
एक कवि बैठा है

कुछ कवितायें लिख रहा है
अब वह बूढ़ा हो गया है

मैंने पूछा,
आप अब सूखे पेड़ हो गये हैं

अब कलम संभलती नहीं
फिर क्यों लिख रहे हैं

कवि ने कहा,
भले मैं सूखा पेड़ हो गया हूँ

लेकिन मेरी कवितायें
सूखे पेड़ की तरह जलकर
दुनिया को रोशनी देगी
-जयचन्द प्रजापति 'जय
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर