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हे नारी तू हेमशिखर सी

                
                                                         
                            हे नारी तू हेमशिखर सी,
                                                                 
                            
दृढ़ है, निश्चल और सबल।

कौन कहे तू अब अबला है
शक्ति है तुझमें तीव्र प्रबल।

तू ही तो जगजननी है
है तू ही माँ वसुंधरा,

वात्सल्य प्रेम से भरा हुआ
तेरा विशाल हृदय सदा ।

तू ही रण चंडी बन कर
दुष्टों का संहार करे, 

माँ अन्नपूर्णा बनकर,
भूखों का तू पेट भरे ।

जीजा बाई बनकर 
शिवाजी सी संतान गढ़े,

पन्ना धाय बनकर 
राजकुंवर की रक्षा करे ।

तूने ही तो निज ममता से
चाफेकर बंधु से लाल दिए,

स्वातंत्र्य की बलिवेदी पर
जो हंसते हंसते झूल गए।

रानी लक्ष्मी भी तू ही,
मरते दम तक संघर्ष करे,

पद्मावती सा साहस तुझमें
जौहर निज सम्मान करें।

क्या कहूँ तुझे क्या गहुँ तुझे
तू तो देवी स्वरूपा है

जो करे ना सम्मान तेरा
मानुष बड़ा अभागा है

हे नारी तू हेमशिखर सी,
दृढ़ है, निश्चल और सबल।

कौन कहे  तू अब अबला है
शक्ति है तुझमें तीव्र प्रबल।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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