एक अक्टूबर 2016 का प्रात:काल था
जब सुनाई थी उसने
अपनी रात्रि दास्तान
दो दिन पहले ही तो भर्ती हुई थी अस्पताल में
मैं भी पास ही सो रहा था
वह जाग रही थी कि
रात्रि 01:30 बजे प्रकट हुआ था
वह काली छाया वाला देवदूत
तब बताया था उसने
कि आज की रात आपकी आखरी रात थी
'फिर मैं कैसे जिंदा हूं अब तक'
इस प्रश्न के उत्तर में भी
बताया उसने
उसके पापों और पुण्यों का खेल
पिछले जन्मों में तुमसे हो गयी थी
अपने पति की अनायास हत्या*
और था आप पर, अपने पुत्र को
घर से निकालने का आक्षेप
जिस निमित्त तुमने उठाई ये बीमारी की पीड़ा
लेकिन उस पर भी भारी थे
तुम्हारे पुण्यों की रस्मे
तुमने पाला था एक लावारिस बच्चा
बिना किसी लोभ बिना किसी लालच
और बड़ा होने पर करायी थी उसकी शादी
तब किया था आपने उसे अलग
अतः तुम्हें बख्शी जाती है और
चार माह की यह बीमार जिंदगी
जिससे निपट जायें तुम्हारे सब पाप
अगला जीवन हो जायेगा निष्पाप
फिर कोई ईश्वरीय यातना नहीं
और
उसके ठीक चार माह बाद
31 जनवरी 2017 को सुबह के 05:52 के आसपास
जब ली थी आपने आखरी सांस
तभी हो पाया था हमें आपकी बातों पर विश्वास
आप थी ईश्वर की प्रिय
तभी आपको देवदूतों ने
बताई आपकी पिछली दास्तां
कितने लोग हैं जिनको
होते हैं इस तरह दर्शन
और किये जाते हैं उन्हें निष्पाप
ईश्वरीय संदेशों से
अब मुझे लगता है कि
जैसे तुम्हें लगभग आठ वर्षों के
कष्ट देकर किया निष्पाप
तुम्हारे न रहने से
ईश्वर ने मुझे भी दी ऐसी कोई सजा
जिसे देना जरूरी था
मेरे पिछले किसी पाप के लिए
क्या ईश्वर ने मुझे भी चुना
दोषमुक्त करने हेतु
या
लम्बे टाइम तक कष्ट उठाने होंगे
मेरा दोष कितना बड़ा था
क्या ईश्वर मुझे भी समझा पायेगा
- जगदीश प्रसाद शर्मा
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