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मेरे जज़्बात

                
                                                         
                            मेरे जज़्बात अधरों से बातें करें,
                                                                 
                            
दिल की तन्हा सदा तुझसे राहत करें,
मेरे जज़्बात अधरों से बातें करें...

तेरी साँसों की ख़ुशबू में भीगा हुआ,
एक रूहानी जादू सा छाया हुआ,
तेरा नाम लूँ तो हर इक दर्द मुस्काए,
तेरी रहमत ही सीने को राहत करे...

लब ख़मोश और दिल गुफ़्तगू में रहे,
तेरी नज़रें दुआ जैसी मुझ पे बहें,
तेरी चाहत से मिलती है वो रोशनी,
जो अँधेरों को नूरे-हिकायत करे...

सज्दे में गिर के जो माँगा तुझे हमने,
तू ही आया जवाबों में हर नेह में,
तेरे इश्क़ की बारिश से भीगे हैं हम,
हर तपिश को भी तू कुछ इनायत करे...

तू नज़र में रहे, तू ही दिल में रहे,
तेरी ज़िक्रत में सारा जहाँ भीग जाए,
जो भी निकले लबों से, वो तेरा पता,
हर दुआ सिर्फ़ तेरी ही चाहत करे...

मेरे जज़्बात अधरों से बातें करें...
-इस्लाम अली
 
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एक वर्ष पहले

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