सोना-चांदी तो सब खरीदते हैं
आओ हम खुशियां खरीद लाये
पैसों रूपयों का मोह छोड़कर
आओ एक नया धनतेरस मनाएं
जूते-चप्पल तो सब खरीदते हैं
आओ हम सम्मान खरीद लाये
मेरा-तेरा ये सब छोड़कर
आओ एक नया धनतेरस मनाएं
महंगे-महंगे कपड़े तो सब खरीदते हैं
आओ हम शर्म खरीद लायें
जलन की भावना को छोड़कर
आओ एक नया धनतेरस मनाएं
अपनों के लिए तो सब खरीदते हैं
आओ हम अपनापन खरीद लाये
नफ़रत के रिश्ते को छोड़कर
आओ एक नया धनतेरस मनाएं
लेखक : इशिका चौधरी
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