अभिनय की परिभाषा तुम थे नवांकुरों की जिज्ञासा तुम थे
इतनी जल्दी चले गए क्यों ? कितनो की अभिलाषा तुम थे
झील-सी गहरी बोलती आँखें अभिव्यक्ति की माध्यम आँखें
अभिनय में जो प्राण फूकतीं ऐसी मदभरी ज़ालिम आँखें
बालसुलभ मुस्कान तुम्हारी दर्शक का मन भी हर जाती
हो कैसी-भी कठिन भूमिका मिलते ही तुम को सरल बन जाती
देश-विदेश के लोग दुखी हैं कला की देवी स्वयं दुखी हैं
अल्पायु में जाने की तुमको बोलो इतनी जल्दी क्या थी ?
'नीर' भी बेकल व्यथित हुआ है जाने से तेरे विव्हल हुआ है
जाते-जाते इतना कर लेना शब्द श्रद्धांजलि स्विकृत कर लेना
नमन् तुम्हें हे कला की मूर्ति अभिनय की जागृत किवदंती
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