मैं इतनी दूर जो तुमको घुमाने लाया हूं।
तुम्हीं से आज मैं तुमको मिलाने लाया हूं।।
अभी मासूम हो नादाँ हो बड़ी भोली हो।
ये ना समझो कि मैं तुमको लुभाने लाया हूं।।
अपनी जानिब से मैं जहमत नहीं होने दूंगा।
ये ना कहना कि मैं तुमको सताने लाया हूं।।
तुमसे बेहतर कोई इंसान न देखा मैंने।
बस यहीं बात तो तुमको बताने लाया हूं।।
शक़्ल ऐ इंसान में तुम एक फरिश्ता ही हो।
तुम्हें ज़ालिम ज़माने से बचाने लाया हूं।।
कहां तुम और कहां ये "मेंहदी" की बस्ती ।
मैं तुमको दिल की दुनियां में बसाने लाया हूं।।
-इक़बाल मेंहदी काजमी
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