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जिसे जाना है जाए मैं खुशामद कर नहीं सकता।

                
                                                         
                            किसी के रूठ जाने से कभी भी डर नहीं सकता ।
                                                                 
                            
जिसे जाना है जाए मैं खुशामद कर नहीं सकता ।।

पसंद आ जाए जो कोई तो अलग बात होती हैं।
मुहब्बत के लिए तो मैं किसी पर मर नहीं सकता।।

मैं जैसा था मुझे हर हाल में वैसा ही रहना है।
किसी बदनाम रस्ते से तो मैं गुज़र नहीं सकता।।

मेरी जुबान पर जो ज़िक्र ऐ परवरदिगार है।
बिना उसके तो मुकद्दर मेरा सवर नहीं सकता ।।

हमेशा से ही वो अपने किए वादों का पक्का है
ये "मेंहदी"दावा है कि वो मुकर नहीं सकता ।।
-इक़बाल मेंहदी काजमी
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एक घंटा पहले

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