जिस आंगन में चहकती हैं, बेटियां,
ये आंगन नही है तुम्हारा , बचपन से सुनती हैं बेटियां,
फिर भी ,उस दहलीज के लिए दुआ करती हैं, बेटियां ।।
पराई हैं-पराई हैं, बचपन से सुनती हैं बेटियां ,
पराई होकर भी , कितनी अपनी हैं बेटियां।।
क्या बड़ी बात है , बेटियां ही तो हैं! बेटियां,
ये कहते वही हैं, जिनके होती नहीं हैं बहन - बेटियां।।
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