तेरा चेहरा चांद सा लगता है
तू रंगत की परी है, तेरे आगे ये गुलाब बदनाम सा लगता है।
और तेरे ज़ुल्फ़ों की तारीफ़ करूं क्या मैं,
बिखरा हुआ रेशमी आसमान सा लगता है।।
तू जो हँस दे तो गुलशन में कलियाँ खिल जाए,
तू जो राे दे तो पतझड़ में बरसात सा लगता है।।
और ज़रा फुरसत हो तो बाहर निकल के देख,
तेरी गली में खड़ा 'अल्फ़ाज' भूला भटका मेहमान सा लगता है।।
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