तुम लौटा क्यों नहीं देते
मेरे गुजरे हुए दिन,
क्या तुम इन सबका भार ढो सकोगे
इसमें आशा है, निराशा है,
किसी पथ पदिक की भारी अभिलाषा है
इसमें सबसे बड़ा दिन है वार
जिसे नहीं मनाया था, मैने हर त्यौहार,
निस्वन अब नहीं रही नीडो में
क्योंकि हर तरफ फैल चुका है बाजार।
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