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पोवारी भाषा को भाग्य चमकेव

                
                                                         
                            मातृभाषा ला देखके
                                                                 
                            
कदम आमरा रुक गया।
मातृभाषा को दर्द,
डोरा लक स्वयं देख लेया।।

प्रेरक साहित्य को
पोवारी मा सृजन कर लेया।
समाज मा चेतना जगायके,
भाषा साती जगनो सिख गया।।

मातृभाषा को विकास की
असीम संभावनाएं देख लेया।
भाषा को गौरव बढ़ावन,
भाषा को साहित्य उन्नत कर लेया।।

मातृभाषा पोवारी मा
रंग-बिरंगी सौंदर्य घोल देया।
भाषा को गौरव बढ़ावन,
दिन-रात परिश्रम को मोल देया।।

हिन्दी जगत मा
मातृभाषा को साथ दस्तक देया।
पायके भरपूर आत्मिकता,
मातृभाषा का भाग्य चमक गया।।

हिन्दी ना पोवारी मा
परस्पर घनिष्ठ संबंध बढ़ाया।
उत्साह उमंग लक ,
मातृभाषा की पहचान बढ़ाया।।

हिन्दी को आंगन मा
पोवारी भाषा को उत्थान पाया।
मातृभाषा पोवारी मा ,
विकास को नवों दौर आन पाया।।

-ओ सी पटले
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3 घंटे पहले

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