हमको न छेड़िए… न कोई बात पूछिए
न दिन की रोशनी, न काली रात पूछिए
क्या ही बयां करेंगी मुफलिसी ये महफिलें
हकीकत को जानना है तो हालात पूछिए
- हरवंश हृदय
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