तेरा देर से आना और मेरा इंतज़ार
तुम देर तक पढ़ती हो पन्ने,
मैं देर तक तोलता हूँ शब्दों को।
तुम तराश रही हो अपना कल,
और मैं सहेज रहा हूँ इन पलों को।
करियर की इस दौड़ में तुम,
सपनों को सच बना रही हो।
गर्व तो है मुझे तुम्हारी उड़ान पर,
पर मेरी घड़ी की सुइयाँ चुभ रही हैं।
स्क्रीन के उस पार बैठा मैं,
उजाले में तुम्हें ढूँढता हूँ।
जब देर से आता है मैसेज तुम्हारा,
मैं खुद ही से सवाल करता हूँ।
अहमियत मेरी थोड़ी ही सही,
पर किताबों के बीच संभाल कर रखना।
जब भी मिले फ़ुरसत का एक पल,
मेरा मैसेज पढ़कर बस मुस्कुरा देना।
"हरि ओम सोनू
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