कैसे बचोगे सब से, वफ़ादार हो ना?
लोग तो गिराएँगे ही, दीवार हो ना?
ज़ख़्मों को छुपाकर जो हँसते रहते हो,
सच कह रहा, मझे हुए कलाकार हो ना?
खामोश बन कर तमाशा जो देख रहे हो,
जुर्म में तुम भी,बराबर के हिस्सेदार हो ना?
खंजर भी उसी हाथ में देखा है तुम्हारा,
जिस पे तुम करते बड़ा, एतबार हो ना?
तुम्हें कहां रही दुश्मनों की जरूरत अब,
अपनी ही तबाही के, ज़िम्मेदार हो ना?
कसूर तुम्हारा है जो निकले हो सुकूं ढूंढने
दायरे मे रहो, तुम खुद के गुनहगार हो ना?
हर तीर तुम्हारे सीने पर लगेगा 'राहुल'
अब उनके निशाने पर हो, तैयार हो ना.?
~राहुल
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