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गुरु उबारते रात दिन, शिष्यों को साकार।

                
                                                         
                            गुरु उबारते रात दिन, शिष्यों को साकार।
                                                                 
                            
समीक्षक खोजते कमी , ढूँढे सभी विकार।।

गुरु शिष्य का जगत में, संबंध है अपार।
मिले गुरुओं के ज्ञान से, जीवन हो साकार।।

धर्म-कर्म जाता रहा, मन में पले संकाय।
दया धर्म को पूजते, ओछे कर्म अकाय।।

सेवा कर मां बाप की, मिले चैनो सुकून।
नई नस्ल क्यों छोड़कर, पहुंच गए रंगून।।
-ज्ञानेश्वर आनन्द ज्ञानेश
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एक घंटा पहले

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