खुशबू तेरी यादों की फैली इस तरह,
ख़्याल फिर न रुक सके किसी भी तरह!
खाब आने लगे दिन में भी तेरे आने के,
खुशनुमा फ़िज़ा महकने लगी बहाने से!
ख़ैरियत जो तेरी पूछी मैंने बयार से,
खुश होकर वह बोली बड़े ही प्यार से!
खैरख्वाह जो तेरे हैं चल पड़े हैं घर से,
खुशी तुम्हें होगी जिसकी सोहबत से!
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