न्यू इंडिया का देखिए,
कैसा अनूठा नया-नवेला अनुशासन है।
भाषण से चलता शासन,
और राशन से चलता यहाँ प्रशासन है।।
जनता बनी है द्रौपदी,
नेता, अफसर, ठेकेदार जाति भरतार है।
वोटरूपी जुये में हारी गई,
चीरहरण कर रहा अब यहाँ कुशासन है।।
वैरागी-योगी हो रहे भोगी,
साधु संत सन्यासी करावे जग में हांसी है।
पद्मासन, शीर्षासन, सिंहासन,
रहा नहीं शेष, फैला चहुंओर भ्रष्टासन है।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X