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मेरे अल्फाज़

"मेरे भारत का किसान"

Gayatri Sharma's

15 कविताएं

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धूप मे तपता है
बारीश मे भीगता है,
फिर भी तुफान से
नही डरता है,
ये भूमिपुत्र
मेरे भारत का किसान है

बीज खेतों मे बोता है
मेहनत से अनाज उगाता है,
फसल कम हो फिर भी
नही डगमगाता है,
ये कृषक
मेरे भारत का किसान है

मेहनत दिन-रात करता है
फसल का कम दाम पाता है,
ठगा जाए फिर भी
हिम्मत नही हारता है,
ये हलधर-
मेरे भारत का किसान है

कर्जमाफी के ढ़कोसले मे
नही आता है,
मेहनत को ही भगवान
समझता है,
अपने खून-पसीने के
पैसों पर ही जीता है,
ये क्षेत्रपाल
मेरे भारत का किसान है

मजदूर अपनी रोजी
कमाता है,
व्यापारी अपना कमिशन
फसल बर्बाद हो जाये फिर भी
सही दाम भी नही
ले पाता है
ये सबका पालनकर्ता
मेरे भारत का किसान है

नुकसान हरसाल सहता है
करोडो़ भारतवासीयों के
रोटी के लिये,
फिरसे फसल बो ने में
जूट जाता है,
ये फौलादी-
मेरे भारत का किसान है

गायत्री शर्मा"चेतना"
दत्तवाडी, नागपूर

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