आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आशावान 2022

                
                                                         
                            दो हजार इक्कीस का, सूर्य हो गया अस्त।
                                                                 
                            
स्वागत में नववर्ष के, प्रतिमन दिखता व्यस्त।।
आशाओं के दीप जलाकर, साल गया है बीत।
दो हजार बाइस से, अब हमको उम्मीद।।
ओमिक्रोन का वायरस, नहीं करे बेहाल।
कॅरोना से जन-जन का, हो चुका बुरा है हाल।।
आपस में सद्भावना, बढ़े जगत में प्रीति।
भारत की यह संस्कृति, यही हमारी रीति।।
आओ लें संकल्प यह, रखेंगे इसका ध्यान।
नए वर्ष में हर प्राणी का, करेंगे हम सम्मान।।
नए साल के सूर्य का, होते ही उत्कर्ष।
चाहत इस 'योगेंद्र' की, प्रतिमन छाए हर्ष।।
नए साल में सभी को, खुशियाँ मिलें अपार।
आत्मीय उत्साह हो, बढ़े सभी में प्यार।।

-डॉ0 योगेंद्र वी0 एस0 तिवारी 'तनय'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर