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" आया बाबा नीम करोली धाम "

                
                                                         
                            " आया बाबा नीम करोली धाम "
                                                                 
                            
(भक्ति-गीत / स्तुति)
आया बाबा नीम करोली धाम,
मन में लेकर प्रभु श्री सीताराम।
बाबा! तेरी महिमा अपरंपार,
दर्शन दे दो, कर दो मेरा उद्धार।
कैंची धाम की पावन धरती,
हर भक्त के मन में श्रद्धा भरती।
जहाँ गूँजता श्रीराम का नाम,
वहीं मिलता मन को सच्चा विश्राम।
जिसने सच्चे मन से बाबा को पुकारा,
बाबा ने उसका जीवन पल भर में सँवारा ।
जिसके जीवन में छाया था अँधियारा,
बाबा ने आकर दिया प्रेम का उजियारा।
आया बाबा नीम करोली धाम,
मन में लेकर प्रभु श्री सीताराम।
बाबा! तेरी महिमा अपरंपार,
दर्शन दे दो, कर दो मेरा भी उद्धार।
राम-नाम की गूँजे वाणी उनके निज धाम,
बाबा की कृपा निराली, बनते बिगड़े काम।
न कोई भेद, न कोई अभिमान,
सब पर बरसे बाबा का वरदान।
चरणों में रख दिया मैंने अपने बिगड़े काम,
अब सँवारो बाबा, मेरे जीवन के हर काम।
मन की हर पीड़ा तुमसे कह आया,
श्रद्धा का दीप हृदय में जलाया।
न माँगूँ दौलत, न माँगूँ सम्मान,
बस चरणों में मिले तुम्हारा मुझको स्थान।
मेरे घर-आँगन में सुख-शांति रहे,
हर साँस में बाबा, तेरा नाम रहे
आया बाबा नीम करोली धाम,
मन में लेकर प्रभु श्री सीताराम।
बाबा! तेरी महिमा अपरंपार,
दर्शन दे दो, कर दो मेरा उद्धार।
जब जीवन की हर राह कठिन हो जाती,
बाबा की याद मुझे हर राह दिखलाती।
टूटे मन को मिलता है आराम,
हृदय में गूँजता प्रभु श्रीसीता-राम।
कैंची धाम की पावन हवाएँ,
मन में भक्ति की ज्योति जलाएँ।
जो आया श्रद्धा लेकर एक बार,
उसके मन में बस गया बाबा का प्यार।
तेरे दर पर बाबा झुकाऊँ अपना सिर,
तेरी कृपा से दूर हों मेरे जीवन के हर डर।
तेरी छाया रहे सुबह और शाम,
हृदय में गूँजता रहे श्रीराम का नाम।
जब तक साँसों की धारा बहती रहे,
तेरे नाम की ज्योति जलती रहे।
तेरा नाम ही मेरा सबसे बड़ा सहारा,
तेरी कृपा से जग में रहे उजियारा।
आया बाबा नीम करोली धाम,
मन में लेकर प्रभु श्री सीताराम।
बाबा! तेरी महिमा अपरंपार,
दर्शन दे दो, कर दो मेरा उद्धार।
तेरे दर से कोई खाली न जाए,
जो माँगे सच्चे मन से, कृपा पाए।
श्रद्धा से जिसने बाबा तेरा नाम लिया,
उसके मन को बाबा ने सच्चा विश्राम दिया।
तेरी महिमा लिखना मेरे बस की बात कहाँ,
तेरी कृपा के आगे शब्द मेरे हैं बे-जुबाँ।
चरणों में अर्पित है जीवन का हर काम,
तेरे भरोसे बाबा, मेरी सुबह और मेरी शाम।
मन में बस एक ही रहे अरमान,
बार-बार आऊँ तेरे पावन धाम।
तेरे चरणों में मिले भक्ति का सम्मान,
मुख पर रहे सदा प्रभु श्री सीताराम।
बाबा! रखना सदा अपनी कृपा की छाँव,
तेरे नाम से रोशन हो मेरा शहर-हर गाँव।
तन-मन-धन सब तुझको अर्पण आज,
तेरी भक्ति ही मेरा सबसे सुंदर राज।
तेरी महिमा गाऊँ सुबह और शाम,
हृदय में बसाऊँ प्रभु श्री सीताराम।
बार-बार आऊँ तेरे पावन धाम—
जय बाबा नीम करोली, जय श्री सीताराम!
— डॉ. प्रदीप बाबू
 
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2 घंटे पहले

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