शांति की मशाल लेकर
हमें आगे आना था
बुद्ध और गाँधी का संदेश
दुनिया को सुनाना था
दुनियाँ को बचाने में
हम क्यों पीछे रह गए
जिन्हें कहा था आतंकी हमनें
वो अमन की राह पा गए।
लोकतंत्र की पहचान हैं
भाईचारे की मिसाल हैं हम
हिंसा के खिलाफ खड़ा
एक बुलंद सवाल हैं हम
मध्य एशिया लगी आग पर
हम क्यों मौन खड़े रह गए
दुनियाँ की उम्मीदें हमसे थी
हम मुकदर्शक बने रह गए
जो विश्वास न रखते न्याय में
वो मध्यस्थ बनकर छा गए
जिन्हें कहा था आतंकी हमनें
वो अमन की राह पा गए।
इतिहास पूछेगा हमसे
जब मानवता कराही थी
अहिंसा की उस विरासत ने
क्यों दूरी अपनाई थी ?
रणभूमि की राख पर
ना मानवता थी ना जज़्बात थे
शांतिदूत की भूमिका में
ना हम दुनियाँ के साथ थे
जो हिंसावादी कहलाते थे
वो सीजफायर करा गए
जिन्हें कहा था आतंकी हमनें
वो अमन की राह पा गए।
सोचना होगा अब हमें
कूटनीति के मोड़ पर
दुनिया की नज़रें टिकी हुई हैं
विश्व-नायक' की होड़ पर
शांति की पहल हमें करनी थी
पर क्योँ हम गच्चा खा गए।
जिन्हें कहा था आतंकी हमनें
वो अमन की राह पा गए
डॉ.महेश यादव ( अमन गाँधी )
भोपाल ( मध्य प्रदेश )
हमें आगे आना था
बुद्ध और गाँधी का संदेश
दुनिया को सुनाना था
दुनियाँ को बचाने में
हम क्यों पीछे रह गए
जिन्हें कहा था आतंकी हमनें
वो अमन की राह पा गए।
लोकतंत्र की पहचान हैं
भाईचारे की मिसाल हैं हम
हिंसा के खिलाफ खड़ा
एक बुलंद सवाल हैं हम
मध्य एशिया लगी आग पर
हम क्यों मौन खड़े रह गए
दुनियाँ की उम्मीदें हमसे थी
हम मुकदर्शक बने रह गए
जो विश्वास न रखते न्याय में
वो मध्यस्थ बनकर छा गए
जिन्हें कहा था आतंकी हमनें
वो अमन की राह पा गए।
इतिहास पूछेगा हमसे
जब मानवता कराही थी
अहिंसा की उस विरासत ने
क्यों दूरी अपनाई थी ?
रणभूमि की राख पर
ना मानवता थी ना जज़्बात थे
शांतिदूत की भूमिका में
ना हम दुनियाँ के साथ थे
जो हिंसावादी कहलाते थे
वो सीजफायर करा गए
जिन्हें कहा था आतंकी हमनें
वो अमन की राह पा गए।
सोचना होगा अब हमें
कूटनीति के मोड़ पर
दुनिया की नज़रें टिकी हुई हैं
विश्व-नायक' की होड़ पर
शांति की पहल हमें करनी थी
पर क्योँ हम गच्चा खा गए।
जिन्हें कहा था आतंकी हमनें
वो अमन की राह पा गए
-महेश यादव
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