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पहले बेटी बचाओ, तब बेटी पढ़ाओ

                
                                                         
                            स्त्री क्या हैं ?
                                                                 
                            
यह प्रश्न उभर
कर आया है
सिर्फ एक शरीर
या सारे संसार का
अस्तित्व समाया है।
देवी स्वरूप कहलाती है
नवरात्री में पूजी जाती है
फिर भी संसार में
अबला कहलाती है
क्या पुरुष ही उसका बल
हैं ?
या पुरुष के आभाव में
उसका जीवन निर्बल है ?
क्यों निर्भर हो उसका जीवन
पुरुषो पर जबकि जीवन का
सबसे ज्यादा भार उठती है
माँ , बहन , बेटी और
पत्नी का भी फर्ज निभाती
लेकिन सिर्फ नवरात्रो में
ही पूजी जाती है
कैसा यह संसार निराला
घर और बाहर मेंअसुरक्षित स्त्री
कैसे रचेगा यह संसार निराला
जब तक स्त्री नहीं होगी सुरक्षित
होगा हर तरफ अँधियारा
पहले बेटी बचाओ, तब बेटी पढ़ाओ
होगा अभियान हमारा
-अनिता गोस्वामी
 
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