कुछ कथायें प्रेम की जो व्यथा सारी बन गईं
प्रेम के हर रूप को बदनाम कर के रह गईं.
क्या कहें, क्या सुनायें आज की पीढ़ियों को
सीख का नव सोपान गढ़ नाम इनके कर गईं.
-दिनेश चौहान
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