तिथियाँ पितृपक्ष की जब से आयीं
कौओं की पूछ हुई और बन आयी.
इंतजार करते हैं स्वागत करते हैं
खोजने पर भी कौवे नहीं मिलते हैं.
काक शास्त्र पढ़ डाला सारा हमने
भेद ना चालाकी का पाया हमने.
कोयल के पीछे पीछे चलते हैं ये
बच्चे भी उसके मिल कर सेते ये.
घूरे के दिन भी लौट कभी आते हैं
पितृपक्ष में कौवे दुर्लभ हो जाते हैं.
-दिनेश चौहान
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