आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

निगहबानी मुझे दे दो

                
                                                         
                            उंगलियां नर्म मेरे हाथों पर रखकर तो देखो
                                                                 
                            
खिड़कियां दिल की हौले से ये खुल जायेंगी.

लट जो गालों पर पड़ी पा के पवन का झोंका
बन्द आँखों से छुअन दिल में वो उतर जायेगी.

कच्चे धागों से बँधा ये प्यार बहुत नाजुक है
घाट पक्का है बना दूर तक हर लहर जायेगी.

भार यौवन का ये सम्भाले जो नहीं सम्भला
सिर को कन्धे पे मेरे रख दो तो नींद आयेगी.

लोग करते हैं सफ़र जान ये हथेली पर लेकर
निगहबानी मुझे दे दो फ़िकर भी चली जायेगी.
-दिनेश चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर