रुक जाओ
या
बढ़ जाओ
जीवन कहाँ ठहरता है
धूप छांव
संग
कांटे लेकर
धीरे-धीरे बस बढ़ता है.
सफ़र सुहाना
लेकर
अफ़साना
सतरंगी हो जाता है
बोल प्यार के
कहने वाला
बीच सफ़र में जब
कोई मिल जाता है.
-दिनेश चौहान
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