पहर दो पहर , हर पहर में रहा।
हमेशा तेरा ही चेहरा नजर में रहा ।।
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बात तेरी रही ख्याल तेरा रहा ।
तेरा तसव्वुर ही शामों-सहर में रहा ।।
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मैंने सोचा की मंजिल तुम्ही हो मेरी ।
दिल है मेरा की मैं बस सफर में रहा।।
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हादसे हादसे हादसे हादसे ।
दिल इन्ही हादसों के असर में रहा ।।
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दिल की शामें मुक़म्मल कभी ना हुई ।
जलती यादों की ये दोपहर में रहा ।।
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खुशनसीबी में उसकी थी उम्रे कटी ।
कई परिंदो का घर उस शजर में रहा ।।
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मैं ना मुझमे रहा , मैं ना तुझमे रहा ।
ना महलों में ना ही मैं घर मे रहा ।।
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