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कलम से मोहब्बत पुरानी लिखूँगा...

Kalam se mohabbt purani likhunga.
                
                                                         
                            कलम से मुहब्बत पुरानी लिखूँगा ।
                                                                 
                            
बुढ़ापे में तेरी जवानी लिखूँगा ।।

नम-नम हुई है जो आँखे ये मेरी ।
ना समझे इसे तो मैं पानी लिखूँगा।।

खत्म कहाँ है जिस्मों पे मेरी ।
मोहब्बत तुमसे रूहानी लिखूँगा ।।

नजर आए सबको तू बातों में मेरी।
मैं लफ्जों से ऐसी कहानी लिखूँगा ।।

खत्म होती कहाँ खत्म होने से मेरे ।
अमर ये तुम्हारी निशानी लिखूँगा ।।

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8 वर्ष पहले

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