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बादल इसके जिम्मेदार

                
                                                         
                            बादल इसके जिम्मेदार
                                                                 
                            
बादल इसके जिम्मेदार,
क्यों बरसा मूसलाधार।
कुछ रिश्वत तू भी ले लेता,
तू भी हमको दुआएं देता।
फिर क्यों सहसा लगातार,
डूब रही मोटरसाइकिल, थार।
तुम्हारी बजह से हमारी पोल खुल रही,
सड़क जो बनी अभी भी कमीशन गिन रही।
शर्म –बेशर्म सी जान पड़ती,
फिर भी कहानी नई– नई गढ़ती।
सड़क में गड्ढे तालाब बनते,
सम्हलते– सम्हलते फिर भी फिसलते।
ठेकेदार से बात की,बोला कमी नहीं हमारी,
रोक सको तो रोको इसके बादल जिम्मेदार।।
- धीरेन्द्र सिंह “धुरंधर”
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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