जिन्दगी तुम अपनी लय में जियो
मगर किसी और की लय न बिगाड़ो।
जुड़ी हैं और भी तुमसे जिन्दगियां
कभी तो उनका मान रख लिया करो।
मुसाफिर है चंद लम्हों की जिन्दगी
झूठा ही सही मगर प्यार दिया करो।
प्रकृति ने अपना कहर बरपा दिया
इससे बड़ा कोई सबक न होगा।
नफरते सहेज कर कैसे रख लेतो हो
जतन ऐसा मोहब्बत के लिए कर लेते।
जिन्दगी तुम अपनी लय में जियो
मगर किसी और की लय न बिगाड़ो।
खुदगर्ज कैसे हो जाते हैं जमाने में
कारवां तो वही है सभी का जमाने में।
सफर भी वही है मंजिल भी वही है
जाना सभी को उसी पड़ाव से ही है।
फरक है सफर मेरा है पड़ाव समय है
हर पड़ाव सुखमय हो सोचना यही है।
न भूलो मंजिलों को सुकून चाहते हो
कर्तव्य निभालो सही काम कर चलो।
जिन्दगी तुम अपनी लय में जियो
मगर किसी और की लय न बिगाड़ो।
- धीरेन्द्र श्रीवास्तव (हृदय वंदन)
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