गर लब मेरे तुझको भिगाना नहीं था,
तो मेरे पास तुझको यूँ आना नहीं था,
इसलिए भी मैं लौटा गली से तुम्हारी
वहां रुकने का कोई ठिकाना नहीं था
याद हमने तुझे तुझसे ज्यादा किया,
फोन करने का लेकिन बहाना नहीं था !
नज़र ना लगे तुझको डर है मुझे,
तुझे चेहरे से पर्दा हटाना नहीं था !
गर मन से खिलाया था खाना मुझे,
तो रोटियां मुझे फिर गिनाना नहीं था !
गर रुख़सत ही करना था खुद से मुझे,
पास आना मुझे फिर सिखाना नहीं था !
पसंद ही नहीं है अगर मेरी आहट,
तो घर का पता फिर बताना नहीं था !
Dheeraj yadav(unnao)u.p
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