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बढ़ता भारत

                
                                                         
                            देवेन्द्र पंत
                                                                 
                            
बढ़ता भारत
गढ़ता भारत l
कहाँ अब अंधेरा
सौर से सवेरा I
जंगल भी बचेगा
मंगल भी नपेगा I
चूल्हा भी जलेगा
राफेल भी उड़ेगा I
गाँव भी रहेगा
शहर भी बढ़ेगा I
पूजा भी, डांडिया भी
मेक इन इंडिया भी I
स्टार्ट अप
स्मार्टन अप I
घर-घर नल
खेतों में भी जल I
फ्री राशन
स्वच्छ शाशन I
रामजी आये घर
अब न कोई बेघर I
बदली चाल
आतंकी निढाल I
अनेकता में एकता
मुँह बाये विश्व देखता I
विज्ञान-अनुसंधान
हमारी पहचान I
नहीं लेंगे सिम्पैथी
जरूर देंगे एम्पैथी I
हम अपने खुद करतार
हमारे पीछे अब कतार I
सीमाओं में हुंकार
डिजिटल इंडिया नया संस्कार I
हमने चांद के अछूते कोने को छाना
सारी दुनिया ने हमारा लोहा माना l
समझौतों पर अब न मजबूरन दस्तक
अब अपने हस्ताक्षर, अपनी शर्त I
अब कहाँ तक गिनाएं
बस अपना रोल निभाएं I
-देवेन्द्र पंत
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एक महीने पहले

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